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POEMS ON WITCH HUNTING BY NARESH SHANDILYA AND RAJESH GOGNA

डायन

और फिर उन्होंने तय कर दिया
कि मैं डायन हूं
और
गांव में होने वाली
हर बीमारी
हर आपदा
और
हर कष्ट का कारण हूं
और
फिर सब की नजरें बदल गईं
जो देखते थे राह
अब सिहरने लगे देखते ही
जैसे कि भेड़िये को देख सिहरती हैं भेड़ें।

अपना ही घर
हो गया कैद खाना
बदलती नजरें, डर, घृणा और दहशत
हर शब्द का मतलब जाना
लोग बदलने लगे रास्ता मुझे देखते ही
और मैं हो गई एक औरत से एक डायन।

और फिर साजिशों की बू
हवा में छाने लगी
और मुझे आने लगी अपने ही मांस की
आग से जलने वाली उबकाई।
फिर सुना कि गांव का ओझा बन गया मसीहा
तय कर दिया कि मैं डायन हूं।
और मेरा मरना ही दिलाएगा मुक्ति
गांव को उनकी सब आपदाओं से
मुक्त करेगा बांझों के घर
लाएगा सूखे कुएं में पानी
लहराएंगी फसलें बंजर खेतों में… मेरे बाद।

बस फिर सारा गांव लग गया मेरी चिता सजाने
लकड़ी, तेल, माचिस, सब इकट्ठा करने
मानो एक महायज्ञ की तैयारी हो
और इस महायज्ञ की आहुति थी मैं।

हवा ने बताया कि दिन तय हुआ एकादशी का
और उस दिन मेरे शरीर को मिलेगी मुक्ति
दुष्ट आत्माओं से
सुना था बकरे को भी बलि से पहले
देते हैं जीने का अहसास
पर मेरी हत्या तो मेरे मरने से पहले ही कर दी गई थी।

और फिर फैल गया गांव में हत्या के जश्न का जोश
डायन, डायन कहते हुए
बढ़ने लगे लोग मेरी ओर
और मैंने देखा कि मेरी मां भी
मुझसे डर कर कांप रही थी
मारो, मारो, के शोर में धधक उठी चिता की आग
लोग चिल्लाने लगे-
मर गई डायन…
डायन मर गई।

– राजेश गोगना
मो. 9911222251
ईमेलः mail@gogna.co.in

छुटकाराः एक डायन से
(नाट्य कविता)

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः
ऊं ह्रीं ह्रूं क्लीं चण्डीकाय नमः
ऊं ह्रीं ह्रूं क्लीं चण्डीकाय नमः …

बैठ जा
यहां नहीं… वहां
क्या चाहता है?
जानता हूं तेरी बेटी डायन है
डायन है तेरी बेटी
पूरे परिवार को तबाह कर देगी
पूरे गांव को तबाह कर देगी वो
सुना तूने
डायन ! डायन !
डायन है तेरी बेटी

क्या कहा, शादी ?
शादी ?
एक डायन की शादी ?
किससे करेगा शादी ?
भूत से ? बैताल से ?
पिशाच – यक्ष – गंदर्भ से ?
या ब्रह्मराक्षस से ?
किससे करेगा अपनी बेटी की शादी ?

भूल जा
शादी को भूल जा
डायन है तेरी बेटी
तुझे, तेरे परिवार को, गांव को
सबको खा जाएगी वो

क्या कहा, छुटकारा ?
छुटकारा मिल जाएगा
हां, मिल जाएगा छुटकारा
उस डायन से छुटकारा मैं दिलाऊंगा… मैं
तीन दिन बाद…
ठीक तीन दिन बाद…
अमावस को… भयंकर काली अमावस को
काले तिल, काले उड़द,
काली चूड़ियां, काली चुटिया
काली सुरा और काला बकरा भी
सब लाने होंगे… सब
मिल जाएगा छुटकारा उस डायन से
सदा के लिए
हां, सदा-सदा के लिए
कई दिनों का प्यासा हूं मैं
और मेरा हवन कुण्ड भी

आज ही छोड़ जा उसे मेरे पास
निकालनी होगी डायन उसके भीतर से
फिर लगाना होगा ठिकाने
पहले डायन को, फिर उसको
वर्ना पीछा नहीं छोड़ेगी वो डायन
तेरे परिवार का
कई पीढ़ियों तक
महा-तांत्रिक हूं मैं
महान ओझा
कई डायनों को लगा चुका हूं ठिकाने

तेरी भलाई के लिए
तेरे परिवार की भलाई के लिए
पूरे गांव की भलाई के लिए
डायन को लगाना ही होगा ठिकाने
अकाल, सूखा, भुखमरी, महामारी…
सबसे बच जाएंगे सब
और सबकी भलाई में ही
भलाई है मेरी भी
हा… हा… हा…
ऊं ह्रीं ह्रूं क्लीं चण्डीकाय नमः…

– नरेश शांडिल्य
मो. 9868303565
ईमेलः nareshhindi@yahoo.com

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